“प्रदेश के बेटे” "शहर के बेटे" के नाम पर फिल्म देखने की अपील पर उठे सवाल ?
शेखर खान पत्रकार
शहडोल। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक फिल्म को लेकर लगातार यह प्रचार किया जा रहा है कि यह “शहडोल के बेटे”, “प्रदेश के बेटे” और “देश के बेटे” की फिल्म है, इसलिए लोगों को फिल्म देखकर समर्थन करना चाहिए। लेकिन अब इस तरह की भावनात्मक अपीलों पर सवाल उठने लगे हैं।
कई लोगों का कहना है कि हर अभिनेता किसी न किसी का बेटा होता है, इसलिए सिर्फ क्षेत्रीय या भावनात्मक जुड़ाव के नाम पर जनता पर फिल्म देखने के लिए बोलना सही नहीं है।
लोगों का मानना है कि दर्शकों को फिल्म की कहानी, अभिनय, निर्देशन और उसके रिव्यू देखकर फैसला लेना चाहिए कि फिल्म देखने लायक है या नहीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि आम जनता अपनी मेहनत की कमाई सिर्फ भावनाओं में बहकर खर्च न करे, बल्कि पहले यह समझे कि फिल्म की गुणवत्ता क्या है। यदि फिल्म अच्छी होगी तो दर्शक खुद उसे पसंद करेंगे और समर्थन देंगे।
फिल्म प्रेमियों का कहना है कि किसी भी कलाकार को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा तरीका उसकी अच्छी कला और मेहनत होती है, न कि केवल “अपने क्षेत्र का बेटा” बताकर फिल्म देखने की अपील करना।
हालांकि दूसरी ओर कुछ लोग स्थानीय कलाकारों को समर्थन देने की बात भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे शहरों से निकलकर बड़े पर्दे तक पहुंचना आसान नहीं होता, इसलिए स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कोई भी फिल्म देखने से पहले उसकी कहानी और रिव्यू को जरूर समझे दर्शक

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