Ticker

6/recent/ticker-posts

2 मार्च से थम सकते हैं बसों के पहिए: नई परिवहन नीति के विरोध में प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान

2 मार्च से थम सकते हैं बसों के पहिए: नई परिवहन नीति के विरोध में प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान




 शेखर खान "पत्रकार"

मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति को लेकर बस संचालकों और सरकार के बीच टकराव गहराता जा रहा है। शहडोल जिला बस ओनर्स एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए परिवहन नीति संशोधनों के विरोध में 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ठप होने की आशंका जताई जा रही है।


बस संचालकों का आरोप है कि 24 दिसंबर 2025 और 29 जनवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन ‘स्टेज कैरेज’ बसों के संचालन के लिए अत्यंत कठोर और अव्यावहारिक हैं। उनका कहना है कि नई शर्तों के तहत बस संचालन करना आर्थिक रूप से संभव नहीं रहेगा, जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि सरकार को पूर्व में लागू व्यवस्था को यथावत रखते हुए नए संशोधनों को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए।


सागर में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि शासन 2 मार्च तक सकारात्मक पहल नहीं करता है, तो प्रदेशभर के बस संचालक अपने वाहनों का संचालन बंद कर देंगे। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हड़ताल के कारण आमजन को असुविधा होती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


इसी क्रम में शहडोल जिला बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवत प्रसाद गौतम (महंत गौतम) और सचिव देवेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान 

रईस अहमद (पप्पू), वीरेंद्र सिंह (दीपू),अजय कुमार साहू,रूपचन्द्र मंगलानी,हसीब खान टीपू, विनय सिंह मोनू, सहित बड़ी संख्या में बस संचालक उपस्थित रहे। 

ज्ञापन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



यदि हड़ताल होती है तो इसका सीधा असर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। प्रदेश की यातायात व्यवस्था पर संभावित संकट को देखते हुए अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि विवाद वार्ता से सुलझेगा या प्रदेश में सचमुच बसों के पहिए थम जाएंगे।

Post a Comment

0 Comments