मेडिकल कॉलेज और नफीस बस सर्विस मारपीट मामले में बड़ा फैसला-
3 साल बाद सभी '15 आरोपी बाइज्जत बरी, कोर्ट ने साक्ष्यों को माना कमजोर
शेखर खान "पत्रकार"
शहडोल। 11 दिसंबर 2022 को मेडिकल कॉलेज परिसर में हुई बहुचर्चित मारपीट की घटना में करीब तीन साल बाद अहम न्यायिक फैसला सामने आया है। नफीस बस संचालक से जुड़े इस मामले में नामजद सभी 15 आरोपियों को न्यायालय ने बाइज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया गया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने लगातार यह तर्क रखा कि पूरे प्रकरण में आरोपियों को झूठा फंसाया गया था और घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। गवाहों के बयानों में असंगति और साक्ष्यों की कमी ने अभियोजन पक्ष की स्थिति को कमजोर कर दिया। कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता न होने के कारण न्यायालय ने यह माना कि आरोप प्रमाणित नहीं हो सके।
फैसले के बाद सभी आरोपियों और उनके परिजनों में खुशी का माहौल देखा गया। लंबे समय से चल रहे इस मामले के खत्म होने पर उन्होंने राहत की सांस ली। वहीं, इस निर्णय के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जांच प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। लोग इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता और साक्ष्य आधारित निर्णय का उदाहरण मान रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर द्वारा कुछ ना कुछ विवाद आम पब्लिक के साथ होता रहता है कहीं शराब के नशे में हंगामा करना और शराब पार्टी करना इनके आए दिन का कार्य है
रईस अहमद (पप्पू भाई)
नफीस बस संचालक
रईस अहमद पप्पू भाई का कहना है कि हमें न्यायपालिका पर शुरू से पूरा भरोसा था कि न्यायपालिका द्वारा हमें सही न्याय मिलेगा और हम दोष मुक्त होगे
हम न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं=रईस अहमद


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