कही आप का भी शस्त्र लाइसेंस फर्जी तो नहीं ?
मध्य प्रदेश से बड़ी खबर: फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़, 13 आरोपी गिरफ्तार
शेखर खान "पत्रकार"
मध्य प्रदेश के भिंड जिला में कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए एक बड़े और संगठित फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों समेत अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह करीब 3 से 5 लाख रुपये लेकर लोगों को नकली आर्म्स लाइसेंस जारी कर रहा था।
कैसे चलता था रैकेट
जांच में सामने आया कि गिरोह अत्याधुनिक तरीके अपनाकर ऑनलाइन दस्तावेजों—पैन कार्ड, आधार कार्ड और फोटो—में छेड़छाड़ करता था। इसके बाद फर्जी लाइसेंस तैयार किए जाते, जिन पर क्यूआर कोड और “जिला अधिकारी भिंड” का नाम तक अंकित किया जाता था, ताकि वे पूरी तरह असली लगें।
पिता-पुत्र निकले मास्टरमाइंड की कड़ी
लहार क्षेत्र से गिरफ्तार सुनील शर्मा और उसका बेटा प्रांशु शर्मा इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, सुनील पर पहले से सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी वजह से उसने अपने बेटे के नाम पर फर्जी लाइसेंस बनवाया था।
‘नेटग्रिड’ से खुला राज
डीआईजी और भिंड एसपी डॉ. असित यादव के निर्देशन में साइबर टीम ने ‘नेटग्रिड’ के जरिए जांच की। जब संदिग्ध लाइसेंसों को आधिकारिक पोर्टल पर सत्यापित किया गया, तो उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला—यहीं से पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की मिलीभगत
इस मामले में कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस ने मधुबाला मौर्य और रामसेवक कोरकू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य कर्मचारियों की जांच जारी है।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 10 पिस्टल (32 बोर) और एक 315 बोर की रायफल बरामद की है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ भिंड तक सीमित नहीं था, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू तक फैला हुआ था।
बड़ा सवाल
पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान में जुटी है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—जब “मौत के लाइसेंस” ही फर्जी हों, तो आम जनता की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे?

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