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जयसिंहनगर कॉलेज में ज्ञान, संस्कृति और श्रद्धा का उत्सव: माँ सरस्वती की आराधना से गुंजायमान हुआ परिसर

जयसिंहनगर कॉलेज में ज्ञान, संस्कृति और श्रद्धा का उत्सव: माँ सरस्वती की आराधना से गुंजायमान हुआ परिसर



शेखर खान "पत्रकार"


शहडोल/जयसिंहनगर

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर जयसिंहनगर कॉलेज परिसर आज श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान की दिव्य अनुभूति से सराबोर नजर आया। विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कॉलेज में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा से भर दिया।


इस भव्य आयोजन का सफल संचालन डॉ. धर्मेंद्र द्विवेदी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उनके सानिध्य में छात्र-छात्राओं एवं कॉलेज स्टाफ ने सामूहिक रूप से माँ शारदे की आराधना कर शिक्षा, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की।

पूजन कार्यक्रम के दौरान डॉ. धर्मेंद्र द्विवेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माँ सरस्वती केवल विद्या की प्रतीक नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और सृजनात्मक सोच की प्रेरणा भी देती हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने आचरण और जीवन मूल्यों में भी उतारें।

कॉलेज परिसर को विशेष रूप से फूलों, मालाओं और पीले रंग की सजावट से सजाया गया था, जो बसंत ऋतु के उल्लास और उमंग का प्रतीक बना। माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष विधि-विधान से पूजन, आरती और मंत्रोच्चार किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पारंपरिक परिधानों में सजी छात्राओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम की सांस्कृतिक गरिमा को और भी बढ़ा दिया।

पूजन के दौरान फल, नैवेद्य और पीले पुष्प अर्पित किए गए तथा सामूहिक सरस्वती वंदना और भक्ति गीतों से पूरा परिसर गुंजायमान रहा। हर चेहरे पर आस्था, शांति और उल्लास की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

कॉलेज प्रशासन का यह प्रयास न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में भी अत्यंत सराहनीय है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार और सकारात्मक सोच का विकास होता है। डॉ. धर्मेंद्र द्विवेदी जैसे मार्गदर्शकों की प्रेरक उपस्थिति में जयसिंहनगर कॉलेज शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है।

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