12 साल बाद शहडोल बमकांड में 20 आरोपी बरी, परिवार वालों ने ली राहत की सास
सबूतों के अभाव में कोर्ट का बड़ा फैसला
शेखर खान "पत्रकार"
शहडोल। वर्ष 2014 में चर्चित रहे सोहागपुर बाइपास बमकांड मामले में करीब 12 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 20 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। लंबे समय तक चले इस बहुचर्चित मुकदमे में अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
यह घटना फरवरी 2014 में शहडोल शहर के सोहागपुर बाइपास स्थित बाणगंगा तिराहे के पास गंगा सागर के घर के सामने हुई थी, जहां अज्ञात आरोपियों द्वारा बम फेंका गया था। घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए थे।
जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले को एक सुनियोजित आपराधिक साजिश बताया था। खुलासा हुआ था कि इस कांड का मास्टरमाइंड सेंट्रल जेल रीवा में बंद एक कैदी था, जो जेल के अंदर से मोबाइल के माध्यम से आरोपियों को निर्देश दे रहा था। पुलिस ने मामले में 19 से अधिक आरोपियों की पहचान की थी और शुरुआती दौर में 9 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था।
हालांकि, लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद दिनांक 21 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने 20 आरोपियों में 7 फरार आरोपियों को छोड़कर शेष 13 को बरी कर दिया आबिद खान, पवन सोनी, पिंटू उर्फ हरीश शर्मा, आदित्य उर्फ बेटू तिवारी, राहुल उर्फ मोनू यादव, शुभम उर्फ चुटकी यादव, दीपकमल उर्फ कंचू चतुर्वेदी, श्रीमती बेसाहने पटेल, पुष्पराज दुबे, आराजू उर्फ मोइन अहमद, शेख आनावर उर्फ बटोले, रामनरेश उर्फ नरेश कोल, सिब्बू उर्फ अभिषेश द्विवेदी , नितिन सिंह उर्फ ददूदो, राहुल उर्फ विकास भारती, बंसराज उर्फ बंचू गिरि, ललवा उर्फ विजय तोमर, राजेंद्र त्रिपाठी, श्रीमती आंजो उर्फ रूनू राव, रहमान खान उर्फ टेक्कल को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद एक ओर जहां आरोपियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
इनमें से कुछ आरोपियों की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र मिश्रा और उनके टीम द्वारा की गई आरोपी दोष मुक्त हुए
वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र मिश्रा


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