धर्म और शिक्षा की नगरी काशी आज गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। यूपी कॉलेज परिसर में दिनदहाड़े छात्र सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिस छात्र के माता-पिता 'अतुलानंद स्कूल' में ड्राइवर और सहायिका की नौकरी कर उसे पढ़ा रहे थे, उसका शव आज खून से लथपथ कॉलेज के बरामदे में पड़ा मिला।
शेखर खान "पत्रकार"
• पुरानी रंजिश: मृतक सूर्य प्रताप हॉस्टल में रहता था, जबकि आरोपी मंजीत सिंह चौहान बाहर (डेलीगेट) का छात्र है। दोनों के बीच 3 महीने से ड्रेस और बैग जैसी छोटी बातों को लेकर मनमुटाव चल रहा था।
• प्रिंसिपल के सामने वारदात: आरोप है कि विवाद बढ़ने पर प्रिंसिपल ने दोनों को ऑफिस बुलाया था। छात्रों का दावा है कि वहां सूर्य प्रताप को अपमानित किया गया और उसी दौरान मंजीत ने ताबड़तोड़ 4 राउंड फायरिंग कर दी।
• 'बागी' पोस्ट का कनेक्शन: आरोपी मंजीत ने 3 दिन पहले ही इंस्टाग्राम पर लिखा था— "हम बागी रहेंगे उन महफिलों में, जहां शोहरत तलवे चाटने से मिलती है।" आज उसने इस 'बागी' सनक में एक साथी की जान ले ली।
हत्या के बाद 200 से अधिक छात्र सड़क पर उतर आए। आक्रोशित छात्रों ने दुकानों पर पथराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सूर्य प्रताप को 20 दिन पहले चेचक (Smallpox) हुआ था। वह आज ही ठीक होकर कॉलेज पहुंचा था। उसे क्या पता था कि जिस शिक्षा के मंदिर में वह भविष्य बनाने जा रहा है, वहीं उसकी अंतिम सांसें लिखी हैं।
1. सुरक्षा में भारी चूक: कॉलेज परिसर के अंदर हथियार कैसे पहुंचा? क्या गेट पर चेकिंग और सुरक्षा सिर्फ कागजों पर है?
2. प्रिंसिपल की भूमिका: छात्रों का आरोप है कि प्रिंसिपल की मौजूदगी में गोली चली। क्या कॉलेज प्रशासन इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है?
3. वर्चस्व का जहर: हॉस्टल और बाहर के छात्रों के बीच 'ईगो' की लड़ाई कब तक मासूमों की बलि लेती रहेगी?
4. इंसाफ की मांग: छात्र 'एनकाउंटर' की मांग कर रहे हैं। क्या पुलिस इस मामले में कोई कठोर नजीर पेश कर पाएगी?
इस तस्वीर में बाएं मृतक छात्र सूर्य प्रताप सिंह है और दाएं आरोपी मंजीत सिंह है।
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। क्या यूपी कॉलेज प्रशासन को इस लापरवाही के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए?


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